मिशन और सहायता · 24 सितम्बर 2026
पोप ने मठवासियों की मौन की आवश्यकता पर जोर दिया
पोप ने मठवासियों के बुलावे के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वे प्रार्थना, निर्धनता और सुसमाचार के प्रति पूर्ण समर्पण के माध्यम से संत फ्रांसिस और संत क्लारा के चारित्रिक गुणों को जीते हैं। उनका मुख्य कार्य ईश्वर के साथ प्रार्थना में एकता बनाए रखना है।
पोप ने संत क्लारा के पत्र का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि हमें अपनी आत्मा को दिव्य के प्रकाश में उठाना चाहिए और प्रार्थना के माध्यम से खुद को ईश्वर के स्वरूप में बदलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बुलावे की कमी न केवल चिंता का विषय है, बल्कि यह नवीनीकरण का अवसर भी है।
पोप ने कहा कि वर्तमान समय में बुलावे की संख्या में कमी हो रही है, जो हमें आत्म-नियंत्रण और समझौते के विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, यह हमें निराश नहीं करना चाहिए, बल्कि हमारे जीवन को नवीनीकरण की ओर प्रेरित करना चाहिए। हमें ऐसे समुदाय बनाने की आवश्यकता है जहाँ हम ईश्वर के करीब रह सकें।
पोप ने यह भी बताया कि बुलावे का उदय केवल संगठनों की रणनीतियों से नहीं होता, बल्कि प्रार्थना, सुसमाचार की निकटता और मौन से होता है। उन्होंने मठवासियों को मौन और ध्यान का गवाह बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मठवासियों का बुलावा धरती पर ईश्वर के राज्य की उपस्थिति का प्रतीक है।