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विश्व कलीसिया · 20 अक्टूबर 2026

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कैथोलिक दैनिक पाठ और चिंतन: 18 अक्टूबर 2026

Rows of empty wooden chairs in a large hall
Johannes Plenio / Unsplash

18 अक्टूबर 2026 के लिए कैथोलिक दैनिक पाठ, भजन और चिंतन जारी किए गए हैं, जिसमें मिशन रविवार और सामान्य समय के सप्ताह के 29वें रविवार का उल्लेख है।

मत्ती के सुसमाचार के अनुसार, फरीसियों और हेरोदियन लोगों ने यीशु को एक प्रश्न के माध्यम से फंसाने की कोशिश की। उन्होंने यीशु से पूछा कि क्या सम्राट को कर देना उचित है या नहीं। यीशु ने उनके मन की बुराई को पहचान लिया और उनसे कर के लिए इस्तेमाल होने वाले सिक्के को दिखाने के लिए कहा। जब उन्हें एक दीनार लाया गया, तो यीशु ने पूछा कि उस पर किसकी छवि और लेख है। उत्तर मिलने पर कि वह सम्राट का है, यीशु ने कहा कि जो सम्राट का है वह सम्राट को दें और जो ईश्वर का है वह ईश्वर को दें।

इस घटना का विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि यह प्रश्न एक जाल था। यदि यीशु कर देने का समर्थन करते, तो यहूदियों द्वारा उन्हें उपनिवेशवाद का समर्थक और अपने राष्ट्र का गद्दार माना जाता, क्योंकि रोमन साम्राज्य ने यहूदियों पर कब्जा कर रखा था। दूसरी ओर, यदि वह कर देने से मना करते, तो उन पर रोमन सरकार के खिलाफ विद्रोह करने या गद्दारी का आरोप लगाया जा सकता था। यीशु के संतुलित उत्तर ने उन्हें इन दोनों खतरों से बचाया और सांसारिक कर्तव्यों तथा आध्यात्मिक दायित्वों के बीच संतुलन का पाठ सिखाया।

अन्य पाठों में, यशायाह की पुस्तक से ईश्वर की महानता का वर्णन है, जहाँ ईश्वर ने कोरीश को राष्ट्रों को वश में करने के लिए चुना। यह पाठ इस बात पर जोर देता है कि ईश्वर सभी राजाओं से ऊपर और सर्वशक्तिमान है। इसके अतिरिक्त, थिस्सलुनीकियों के लोगों को लिखे गए पौलुस के पहले पत्र में विश्वास के कार्यों, प्रेम के प्रयासों और आशा के धैर्य के लिए आभार व्यक्त किया गया है। यह पत्र विश्वासियों को जीवन के वचन को थामे रखकर दुनिया में सितारों की तरह चमकने का आह्वान करता है।